Problem of Democracy in India.
भारत जैसे बड़े और विविधता वाले देश में लोकतंत्र स्थापित करना एक बहुत ही बड़ा कार्य है और साथ ही साथ अत्यधिक प्रसंशनीय भी। परंतु प्रश्न यह उठता है की क्या हम लोकतंत्र स्थापित करने में सक्षम हो पाये हैं? लोग इसे हमारे संविधान की असफलता कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन एक लोकतंत्र की स्थापना में इन्ही लोगों की आवश्यकता है। आज हम लगभग 66 साल बाद थोड़ी बेहतर अवस्था में हैं, परंतु क्या हम कल्पना कर सकते हैं की 1950 के दशक में क्या स्थिति रही होगी? एक नए मुल्क के निर्माण की नीव रखी जा रही थी, संविधान के रूप में। संविधान के निर्माताओं ने एक अत्यधिक साहसिक कदम उठाते हुए देश में वयस्क मताधिकार देने का प्रावधान लागू किया। भारत जैसे अत्यधिक अशिक्षित देश के सन्दर्भ में ये कदम कहाँ तक वाज़िब था। परंतु एक शक्तिशाली लोकतंत्र की स्थापना के लिए ये अत्यधिक आवश्यक था। इस कदम के कछुए की चाल वाली प्रवृत्ति का ही नतीजा है की आज 66 वर्ष बाद भी हमारा लोकतंत्र अधूरा है। लोग आज भी अपना मताधिकार बेच रहे हैं। आज भी निरक्षरता देश को खाये जा रही है। कहा जाता है की ये संविधान देश की जनता का स्वयं के लिए बनाया हुआ है। कौन सी जनता? वही जिसे संविधान का 'स' भी नहीं पता। वर्त्तमान समय की दरकार है विधिक साक्षरता। और इसे पूरा करना होगा हमें। People of India को।।
भारत जैसे बड़े और विविधता वाले देश में लोकतंत्र स्थापित करना एक बहुत ही बड़ा कार्य है और साथ ही साथ अत्यधिक प्रसंशनीय भी। परंतु प्रश्न यह उठता है की क्या हम लोकतंत्र स्थापित करने में सक्षम हो पाये हैं? लोग इसे हमारे संविधान की असफलता कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन एक लोकतंत्र की स्थापना में इन्ही लोगों की आवश्यकता है। आज हम लगभग 66 साल बाद थोड़ी बेहतर अवस्था में हैं, परंतु क्या हम कल्पना कर सकते हैं की 1950 के दशक में क्या स्थिति रही होगी? एक नए मुल्क के निर्माण की नीव रखी जा रही थी, संविधान के रूप में। संविधान के निर्माताओं ने एक अत्यधिक साहसिक कदम उठाते हुए देश में वयस्क मताधिकार देने का प्रावधान लागू किया। भारत जैसे अत्यधिक अशिक्षित देश के सन्दर्भ में ये कदम कहाँ तक वाज़िब था। परंतु एक शक्तिशाली लोकतंत्र की स्थापना के लिए ये अत्यधिक आवश्यक था। इस कदम के कछुए की चाल वाली प्रवृत्ति का ही नतीजा है की आज 66 वर्ष बाद भी हमारा लोकतंत्र अधूरा है। लोग आज भी अपना मताधिकार बेच रहे हैं। आज भी निरक्षरता देश को खाये जा रही है। कहा जाता है की ये संविधान देश की जनता का स्वयं के लिए बनाया हुआ है। कौन सी जनता? वही जिसे संविधान का 'स' भी नहीं पता। वर्त्तमान समय की दरकार है विधिक साक्षरता। और इसे पूरा करना होगा हमें। People of India को।।