Monday, 24 April 2017

"ये नयन डरे डरे......."

हेमंत कुमार की शीतल आवाज़, कैफ़ी आज़मी की कलम का जादू, और background में आपकी one of the favourite वहीदा रेहमान....... शायद ही किसी और चीज की ज़रूरत होगी इस गाने पे पांचवा चाँद लगाने के लिए। ये गाना जिंदगी का पहला प्यार था। अभी भी है। और आज भी याद है, इस गाने के साथ बिताए हुए वो सारे हसीन पल। ये एक महज इत्तेफाक ही है की पहली बार इस गाने को कोहरे में ही सुना था।
 मैं विविध भारती का शुक्रगुज़ार हूँ, जिसने इस गाने की कुछ मीठी यादें मेरे लड़कपन के साथ नत्थी कर दी। आज भी वो रात याद है, वो कोहरे वाली रात, जब पहली बार इस गाने को सुना। विविध भारती पर, रात 10 बजे, छाया गीत में। सुनने के बाद रेडियो बंद कर दिया था, ताकि भूल न जाए। उस दौर में फ़ोन और downloading ये सब असुविधाएं नहीं थीं। ये love at first hearing था मेरे लिए, और आज तक साथ निभा रहा है। इसकी जगह शायद ही कभी किसी और गाने को दे पाऊँ।


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