Friday, 19 May 2017

आस्था और व्यापार - 2

चप्पल और प्रशाद का combo pack.........

विंध्याचल जाना मेरे लिए बहुप्रतीक्षित था। परीक्षा ख़त्म होने के बाद ही यहाँ आने का प्लान बना लिया था। अब सबसे पहले हम पहुंचे अष्टभुजा माता मंदिर के द्वार पर। मंदिर ऊपर पहाड़ी पे स्थित था। इस लिए सैकड़ों सीढ़ियाँ चढ़ कर वहाँ पहुँचना होता है। मेन रोड से मंदिर की सड़क पर चलने लगा। दोनों तरफ दुकाने सजी थीं। कहीं चाय नास्ते की तो कहीं पूजा सामग्री की। '10 रु में कोई भी सामान' वाली दुकानें वहाँ सबसे अधिक थीं। उस गली को पार करने के बाद सीढ़ियाँ शुरू हुईँ। यहाँ चप्पल जूते उतारने की आवश्यकता थी। लेकिन मंदिर प्रशासन की कोई व्यवस्था नहीं थी आपके जूते चप्पल को रखने की। सो भारत भर के सैकड़ों मंदिरों की तरह यहाँ भी आदमी को एक डील करनी पड़ती है। उसे प्रशाद वालों से प्रशाद खरीदना पड़ता है, बदले में प्रशाद वाला उसके चप्पल की रखवाली करता है। यहां इस contract में यूँ तो कोई guarantee या indemnity नहीं मिलती, पर आदमी के पास और कोई चारा नहीं होता है। यूँ तो मुझे भी प्रशाद चढ़ाने में कोई विशेष श्रद्धा नहीं है। परन्तु चप्पल की सुरक्षा के लिए हमें भी ये कॉन्ट्रैक्ट करना पड़ा। सो हमने सबसे सस्ता वाला पैक चुना और प्रशाद ले कर ऊपर सीढ़ियों पर चल दिए.............
                       ...........क्रमशः 

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